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Old 06-25-2009, 11:07 AM
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sacsirag is on a distinguished road
Talking xxx stories in hindi (cinema hall mai gand marai)


सिनेमा-हाल में गाण्ड मरवाई

दोस्तों एक बार फ़िर सनी का गीली गाँड से घोड़ी बन कर नमस्ते। अभी चिकना मस्त गाँडू नम्बर एक बन चुका हूँ। पिछली ठुकाई छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के डिब्बे में दो हट्टे-कट्ठे फौजी से करवाई। फौजी से चुदवाने के बाद १० दिन मुझे लंड नहीं मिला। मैं अपनी सोसाइटी में अमीर लड़कों से कभी नहीं मरवाता, स्कूल और आसपास के लोगों को मैंने अब तक भनक भी नहीं पड़ने दी है कि मैं गाँडू हूँ। मुझे चैट पर मेरे जैसे एक गाँडू ने मुझे बताया कि सिनेमा में लगने वाली ब्लू देखने जाने पर वहाँ बहुत बढ़िया लंड भी जाते हैं और मुझे उसी लड़के ने कहा कि तू अपने साथ निरोध रख कर डालकर मरवाया कर, उस वक्त से मेरी जेब में हर वक़्त निरोध रहते हैं।

मैं सिनेमा इन्दर पैलेस पहुँचा जिसमें ब्लू फ़िल्म लगी थी, वहाँ पर ज़्यादा लोग रिक्शा वाले या प्रवासी मर्द थे। मैं अकेला ही एक अच्छी सोसाईटी का लग रहा था। मैं वहाँ खड़े मर्द लोगों को निहारने लगा, तभी मेरे पास एक मर्द खड़ा था, मैंने अपना मोबाईल निकाला ख़ुद बेल बजाई ताकि उसको लगे, किसी का फ़ोन है, "हैलो राजू, तुम... एँ.... क्यों... नहीं... मैं अकेला देखने में क्या फ़ायदा..." कहकर मैंने मोबाईल बन्द कर दिया और वहाँ से निकलने लगा। मैंने उसकी ओर देख मुस्कुरा दिया। वह शरारती नज़रों से देख मेरी ओर मुड़ा, "अकेले देखने में मुझे भी मज़ा ही नहीं आता।" और वह वहीं रुक गया। फिर न मैंने बात की, न उसने। मैंने पैसा निकाल बालकनी की टिकट ले ली। वह बिल्कुल पीछे खड़ा टिकट लेने लगा। मैं टिकट लेकर अन्दर गया, लेकिन अभी बालकनी के बाहर रुक कर उसका इन्तज़ार करने लगा। उसे देख मैं बाथरूम की ओर गया। वह वहीं बोला, "चल चलें, अच्छी सी सीट लेते हैं।"

दोनों अन्दर गए, पहले कुछ न दिखा। अंधेरा ही अंधेरा, वही मेरा हाथ पकड़ कर कोने में ले गया बालकनी में। सिर्फ हम दोनों और मुश्किल से ३ और लोग होंगे। हम डबल सीट पर बैठ गए। पीछे बॉक्स था जो खाली था। बत्ती बन्द होते ही मैं उसके साथ चिपक कर बैठ गया। उसने अपना हाथ मेरी जाँघ पर फिराना शुरु किया, मेरी गाल को चूमने लगा। मैंने उसका लंड पकड़ लिया, ज़िप खोलकर लंड निकाल सहलाते हुए झुककर चूम लिया। अब मैंने ज़ुबान निकाल कर लंड चाटना चालू किया, तो वह मेरे बालों में हाथ फिराने लगा। मैं भी चूसने लगा। मौक़ा देखकर मैं बॉ़क्स में कूद गया। वह भी पीछे आया और मुझे पकड़ लिया। उसका ज़बर्दस्त लंड थाम मेरी गाँड मरवाने की चाहत बढ़ गई। मैंने ख़ुद ही पैन्ट उतार कर घुटनों तक सरका ली। वह मेरी सफ़ेद जाँघों को देख कर बोला, "तू तो साले टाइम निकाल कर चोदने की चीज़ है।"

मैंने कमीज़ ऊपर कर उसे अपना निप्पल चूसने को कहा, तो वह बोला "तू कहीं कोई लड़की तो नहीं? वह बिना बोले चूसता गया, उसने आहें ले-लेकर मेरी गाँड में ऊँगली डाल दी। वहीं नीचे ज़मीन पर सीट से निकली फोम पड़ी थी, मैं उस पर गिर गया। वह मेरे ऊपर चढ़ गया, चुम्मा-चाटी करवाने के बाद मैं घोड़ी बन गया। जेब से निरोध निकाल उसके लंड पर डाल दिया। उसने धक्के दे-देकर अपना पूरा लंड अन्दर पहुँचा दिया। मैंने बिना किसी परेशानी के उसका लंड ले लिया। वह चोदने लगा, अलग-अलग मुद्राओं में। हम इतने मगन थे कि इन्टरवल में बत्ती जल जाने के बाद भी चुदाई का मज़ा लेने में लगे ते। तेज़ धक्के मारते हुए वह झड़ गया और मेरे ऊपर लुढ़क गया, पर मुझे अभी संतुष्टि नहीं मिल पाई थी।

तभी टॉर्च की रोशनी हम पर पड़ी, "यह क्या हो रहा है।"

उस साले ने ज़िप तो खोल ही रखी थी, झट से लंड अन्दर डाला और कूदकर वहाँ से भाग गया। मैं वहाँ अब अकेला रह गया था। इससे पहले कि मैं पैन्ट पहनता, हॉलकीपर कूद कर वहाँ आया और उसने मुझे पैन्ट पहनने से रोका, बोला, "मैं तुम्हें संतुष्ट कर दूँगा, मौक़ा दे, या फिर बताऊँ नीचे जाकर।" वह काला-कलूटा भयानक आदमी था।

मैंने उसे रोका, "नहीं।" और उसे पकड़ लिया। मुझे सचमुच अभी तसल्ली नहीं मिली थी। वह जल्दी चोद गया। काफी दिनों के बाद लंड मिला था। मैंने उसके लंड को मुँह में ले लिया। उसने कहा, "यहाँ मज़ा नहीं आएगा। चल पास में ही मेरा घर है।"

वह मुझे उसके घर पर ले गया। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए मज़े लेने लगे। उसका ताक़तवर लंड मेरी गांड के अन्दर-बाहर हो रहा था। मैं आहें भर-भर कर गांड मरवा रहा था। उसमें इतना दम था कि आधा घंटा उसने बिना रुके घोड़ी बनाकर मुझे चोदा, और फिर ऊपर से चढ़ गया। जब वह झड़ने लगा, लंड निकालने के बाद, निरोध उतार कर उसने सारा माल मेरे मुँह में निकालना शुरु किया। मैंने कुछ तो पी लिया, बाकी का उसने चटवा कर साफ़ करवा लिया।

मुझे दसवाँ लंड मिल गया और इस लंड से मैंने लगातार सोमवार से शनिवार तक चुदवाया, उसके बाद वह मुझे बोर लगने लगा, और मैं निकल पड़ा अगले लंड की तलाश में। और जल्द ही अगला लंड मुझे दिल्ली में मिला, जब पापा ने मुझे फिर से कुछ पैसे का भुगतान करने के लिए दिल्ली भेजा।

अधिक प्रतीक्षा न करवाते हुए मैं जल्द ही अगली कहानी लिखूँगा।




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Last edited by sacsirag; 06-25-2009 at 12:03 PM. Reason: xxx stories in hindi (daily updates)
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Angelina (11-09-2009)
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Old 06-25-2009, 11:32 AM
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sacsirag is on a distinguished road
Talking train mai chudai

ट्रेन में लंड चूसा
प्रेषक : सनी

दोस्तों ! सनी का आप सब को फ़िर से खुली गांड से प्रणाम !

दोस्तों अब तक मैं अपनी चुदाई के दो किस्से लिख चुका हूँ, पहली बार गांड किस तरह सुनसान बाग़ में एक बिहार से पंजाब में काम करने आए हुए एक मोची से करवाई, फ़िर दूसरा लंड भी मोची के साथ में ही कमरे में रहने वाले उसके ही एक दोस्त से उसकी गैर मौजूदगी में लिया।

और फ़िर एक बार आपके सामने अपनी एक और चुदाई पेश करने जा रहा हूँ, तो वैसे भी मैं लड़की ही बन गया हूँ मुझे अलग अलग लंड लेने का चस्का पड़ गया है।

मेरे पापा का दिल्ली से कपड़े ला कर पंजाब में बेचने का है, अब उनके ठीक न होने की वजह से मुझे जाना पड़ता है।

दिल्ली से वापिस आने के लिए इस बार भी मुझे रात को ट्रेन लेनी थी मैंने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पकड़ ली। मैं खिड़की के पास अपना बैग रख बैठ गया। गाजियाबाद स्टेशन से सहारनपुर तक के काफी लोग चढ़ आए। डिब्बा दिल्ली से पीछे से ही भर के आया था। लगता है बिहार के मर्दों के लंड मेरी गांड की किस्मत में ज्यादा हैं, मेरठ केंट से दो हट्टे-कट्टे फौजी डिब्बे में घुसे।

पैर पे पैर पहले से चढ़ रहे थे, मैं उनके आगे खड़ा था, पहले ही गांड घिसा के मजे ले रहा था, दोनों ने शॉल औढ़ रखे थे। मेरी गांड उनमें से एक के लंड पे पूरी तरा दबाव डाल रही थी उसका लंड सॉलिड लगा। उसने पहले ध्यान नहीं दिया पर मुझे कुछ होने लगा, गांड में खुजली मचने लगी। मैंने गांड को पीछे धकेला और उसके लंड पे घिसा दिया। उसको अब लगा कि यह माल ही है, उसका अकड़ने लगा। मैंने फ़िर से गोल गोल गांड को गोल गोल तरीके से घिसाया अभ उसको विश्वास होने लगा कि मैं ख़ुद गांड घिसा रहा हूँ। उसने मेरी लोई में हाथ डाल अपनी ऊँगली मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरी गाण्ड में डाल दी। मैंने कुछ कहने की बजाये ख़ुद गांड को उसकी ऊँगली की तरफ़ धकेला जिससे ऊँगली अच्छी तरह घुस जाए।

उसने पीछे खड़े दूसरे फौजी को सब बता दिया, दूसरा वाला भी मेरे पीछे ही खड़ा हो गया। पहले वाले ने ऊँगली देनी चालू रखी दूसरा पास आ बोला- बहुत भीड़ है !

मैंने कहा- हाँ !

कहाँ से हो?

मैंने कहा- पंजाब !

ओह हमें भी अमृतसर जाना है ,फ़िर तो पूरे सफर के साथी हो।

पीछे वाला कान के पास आकर बोला- अच्छा लग रहा है?

बहुत अच्छा !

इतनी भीड़ में नीचे किसी का ध्यान न था। दूसरे वाला मेरे सामने खड़ा हो गया। उसके और मेरे चेहरे में बहुत कम फासला था। हवा में चुम्बन देकर आंख मारते हुए मेरा हाथ पकड़ अपनी लोई में ले गया उसने जिप खोल मेरा हाथ अपनी पैंट में घुसा दिया, मैं उसका लण्ड सहलाने लगा। पीछे वाला अन्दर हाथ डालना चाहता था लेकिन मैंने आगे से इलास्टिक की गांठ खोल दी। उसने इलास्टिक खींच ली और मेरा लोअर नीचे खिसका मेरी गांड पे हाथ फेरने लगा, थूक लगा ऊँगली डाल दी। आगे वाले के लंड को मैं प्यार से सहला रहा था।

तभी सहारनपुर आने वाला था, आधे से ज्यादा डिब्बा यहीं खाली होने वाला था। लोग सीट से उठ खिड़की की तरफ़ बढ़े, हम तीनों कपड़े ठीक कर साइड पे खड़े हो गए। काफी सीट खाली हुई लेकिन कोई तीन लोगों का एक साथ बैठने वाली नहीं।

ट्रेन चली, हम तीनों बैठ गए अलग अलग ! मायूस !

तभी आधे घंटे में जगाधरी आया और डिब्बा लगभग खाली ही हो गया। बैठने क्या लेटने के लिए एक केबिन तो पूरा खाली था। इसके बाद सीधा अम्बाला में गाड़ी रुकनी थी। हमने बैग सीट पे रख लिए। उनमें से एक ने अपना बिस्तर-बंद खोल नीचे फ़र्श पर बिस्तर लगा लिया। दोनों एक तरफ़ मुँह कर लेट गए। मैं बीच में उनकी पैर की तरफ़ मुँह करके लेट गया। मैं इकट्ठा सा हो अपना मुँह उनकी जांघों तक ले आया।

दोनों ने लंड निकाल रखे थे। मैं आराम से चूसने लगा। उन दोनों ने मेरी गाण्ड नंगी कर दी और सहलाने लगे। वो बोला- यार तेरी गांड मारनी है, कैसे मारूँ? यह चूसना वगैरा तो अन्दर छिप के हो जाता है।

तभी हमने फैसला किया कि सामने वाली सिंगल सीट पे उनमें से एक बैठेगा ताकि कोई आए तो वो बोल दे !

मैं उल्टा होकर लेट गया, पूरा घोड़ा नहीं बना। गांड थोडी सी ऊपर कर दी, उसने पीछे से अपना मजबूत लंड को थूक लगा धक्का दे थोड़ा अन्दर किया। फौजी का लंड था, फाडू तो होगा, मैंने सह लिया। उसने अहिस्ता से सारा पेल डाला और चोदने लगा। मैं भी गांड धकेल धकेल के चुदने लगा।

दूसरा उठा और पूरे डिब्बे का मुआयना करके आया, सामने घुटनों के बल बैठ गया। मैंने उसका लंड मुँह में लिया। अब मैं पीछे से गांड आगे से मुँह चुदवा रहा था।

तभी उसने तेज धक्के मारने चालू किए, किसी के आ जाने के डर से उसने जल्दी ही अपना सारा गाढ़ा माल धार से उगल दिया। तभी दूसरे वाला पीछे आया, पहला फ़िर डिब्बा देखने गया। दूसरे वाले ने मुझे अपने लण्ड पे बिठा लिया और मैं उछल उछल के चुदने लगा। हाय ! क्या लण्ड है तेरा ! फाड़ डाल आज मेरी गांड ! लगा दे फौजी वाला दम !

उसने एक दम से मुझे अपने नीचे डाल लिया, दोनों टांगें कंधों पे रख कर चोदने लगा। मुझे यह तरीका सबसे अच्छा लगता है क्यूंकि नंगे मर्द के नीचे लेटने से मुझे बहुत सुख मिलता है। यह ज़बरदस्त खिलाडी था ज़ोर ज़ोर से चोदते चोदते उसने एक ज़बरदस्त धक्का मारा और सारा पानी मेरी गांड में डाल दिया, मेरे ऊपर लुढ़क गया।

हम तीनों ने अपने कपड़े ठीक किए। वैसे भी लुधियाना आते ही डिब्बे में चाय वाले घुस गए। हमने चाय पी, दोनों ने मुझे अपने बीच बिठा रखा था मुझ से लण्ड सहलवा रहे थे।

ट्रेन चलते ही, अब यह जालंधर रुकेगी, दोनों ने मुझे फ़िर से पकड़ लिया और चोदने लगे। दूसरे वाले को ज्यादा मजा आ रहा था तभी उसने लगतार दो शिफ्ट लगाने की सोची। दोनों मुझे एक एक बार फ़िर चोदने के बाद भी नहीं रुके, बोले- अब अमृतसर रुकेगी !

मैंने सोचा- ले सनी ! तेरी गांड तो ये दोनों सुजा के घर भेजेंगे। वो थे ही इतने हट्टे-कट्टे !

ब्यास से ट्रेन चली ही थी कि दोनों ने फ़िर लण्ड निकाल लिए। अब कोई कम्बल नहीं था। वो दोनों सीट पे बैठ गए, मैं नीचे घुटनों पे बैठ बारी बारी से दोनों के लंड चूसने लगा। इस बार मैंने दोनों बाहें सीट पे रख गांड उनकी तरफ़ घुमा ली, उसने डाल दिया।

अमृतसर आने तक रेल में वो मेरी गांड की रेल बना रहे थे। रात के साढ़े दस बजे से उनके लंड कभी मेरे हाथ में, कभी मुहं में, कभी गांड में !

दोनों ने मुझे बहुत ज़ोर लगाया कि मैं उनके साथ केंट में उनके क्वार्टर में चलने का।

मैंने कहा- अपने मोबाइल नम्बर दे दो, मैं कॉल कर लूँगा, तभी प्रोग्राम बना के में आपके सरकारी क्वार्टर में चुदने आ जाऊंगा।

दोनों ने मिलकर मुझे वो सुख दिया जो एक हफ्ते से मेरी गांड को नहीं मिला था। मेरी गाण्ड की सारी खुजली मिटा डाली।

जाते वक्त बोले- और भी लंड तेरी गांड में घुसवाएँगे !

दोस्तो ! यह थी मेरी एक और चुदाई की कहानी !

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Old 06-25-2009, 11:36 AM
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Talking labo ko kyon khol rakha hai (hindi poem)


लबों को खोल रक्खा है




जबसे लन्ड ने चूत को निशाना बना रक्खा है,

चूत ने भी लबों को अपने खोल रक्खा है।


टट्टो तुम चूत को पीटते क्यों हो,

तुम को किसने अन्दर जाने से रोक रक्खा है।


लन्ड के खौफ़ से चूत सहमी रहती थी पहले,

अब तो उस ने चुदाई का मज़ा चख रक्खा है।


चूत हर वक्त लन्ड को खुश आमदीद कहे,

लन्ड के रास्ते में उस ने छिड़काव कर रक्खा है।


चूत को लन्ड से मुहब्बत हो गयी कुछ ऐसी,

रात दिन उस ने दर अपना खुला छोड़ रक्खा है।


चूत लन्ड को नहला धुला कर बाहर भेजे,

लगता है उसने अन्दर हमाम बना रक्खा है।


चूत भी क्या चीज़ है, खट्टी भी तुर्श भी,

फिर भी उसके जूस में कितना मज़ा रक्खा है।


सब कोई लड़ाई झगड़े से नफ़रत है लेकिन,

चूत ने लन्ड के लिये मैदान बना रक्खा है।


लन्ड अन्दर जाये तो चूत, खिल खिल जाती है,

एक एक धक्के पर लन्ड के, चूत हिल हिल जाती है,


ऐसे मिलें जैसे ताल से ताल मिल जाती है,

इसी झटके इसी धक्के में तो मज़ा रक्खा है॥


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Old 06-25-2009, 11:40 AM
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Arrow masti kothe ki

मस्ती कोठे की

बात उन दिनों की है जब मुंबई में दंगे चल रहे थे। पुणे में भी कुछ दिनों के लिए बस सर्विस बंद थी।

मैं उन दिनों पुणे के लिए एक बस में चली। बस में मेरी बगल में उषा नाम की आंटी बैठी थीं। उषा आंटी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई।

बस बड़ी धीरे सफर कर रही थी। शाम के 2 बजे बस ख़राब हो गई। बस वाले ने कहा अब बस नहीं चलेगी। पुणे ४० किमी दूर था। बस में मैं और आंटी ही अकेली औरतें थीं। मैं घबरा रही थी बस में कुछ गुण्डे टाइप लोग भी थे जो रास्ते भर हमें गंदे गंदे इशारे कर रहे थे।

आंटी मुझसे बोली- मैंने टैक्सी बुलाई है, तुम पुणे तक साथ चल सकती हो लेकिन उसके आगे रास्ते बंद हैं। मैं खुश हो गयी, मैंने कहा- आंटी मैं आपके साथ रुक जाऊंगी।

आंटी बोली ठीक है लेकिन मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ। आंटी ने कहा- बेटी, मैं एक कोठे की मालकिन हूँ मेरा कोठा बुधवार पेठ में है वहाँ पर ५० -६० लड़कियां धंधा करती हैं। पूरे दिन रात उनकी चुदाई होती है। पर यह मेरा वादा है कि अगर तुम मेरे साथ चलोगी तो तुम्हारी मर्जी के बिना मैं तुम्हारी चुदाई तो नहीं होने दूंगी लेकिन तुम्हारी चूची और चूतड़ दब सकते हैं, मतलब तुम्हारी जवानी लुटेगी तो नहीं लेकिन मेरे गुंडे मस्ती करने से बाज़ नही आयेंगे। बाकी अगर कहीं और रूकती हो तो जवानी लुट भी जायेगी और ब्लू फ़िल्म अलग से बन जायेगी, मुझे पुणे का सब पता है, वैसे तुम शादीशुदा हो कोठे पे छेड़छाड़ से मजा ही आएगा।

आंटी की बात सुन मैं डर गई लेकिन मेरी चूत में खुजली सी भी मची कि कोठे की मस्ती में मज़ा तो बहुत आएगा।

मैंने- कहा आंटी, यहाँ चूत तो चुदेगी ही, जान का भी खतरा है। यह बस के ही लोग मुझे चौद डालेंगे, सब गुण्डे टाइप लग रहे हैं। आप ले चलो, कोठे पे ही सही।

थोड़ी देर में आंटी की टैक्सी आ गई। हम उसमें बैठ गए। आंटी ने पुणे से ५-६ किलोमीटर पहले ही मुझे बुरका पहना दिया और ख़ुद भी बुरका पहन लिया।

शाम ४ बजे हम बुधवार पेठ में आंटी के कोठे पे थे। कोठे पे हमारे घुसते ही एक मुस्टंडे ने मेरे चूतड़ पीछे से दबा दिए और बोला- मौसी माल तो बड़ा तगड़ा लायी हो, आज्ञा हो तो नंगा कर दूँ कुतिया को।

मौसी ने कहा- हरामी हाथ मत लगाइयो, मेहमान है, चल बेटी अंदर चलें।

अंदर रंडियाँ अर्द्धनग्न खड़ी थी कुछ पेटीकोट और आधे से ज्यादा खुले ब्लाऊज़ पहने थी.

मौसी मुझे चौंकते देख कर बोली- अरे चौंक क्यों रही है यह कोठा है, रात को दिखाउंगी कैसे यह रंडियाँ ६-६ लंड खाती हैं. आ चल थोड़ा फ्री हो लें। तुझे भी तो थोड़ी रंडीबाजी सिखा दूँगी, ताकि तुझे याद तो रहे की कभी कोठे की सैर भी की थी। घबरा मत तेरी चूत तभी चुदेगी जब तू चाहेगी लेकिन मर्दों के लंड तो पकड़ ही सकती है और चूची चूतड़ तो दबवा ही सकती है। रोज रोज एस मस्ती तो नही मिलेगी। परमानेंट रंडी बनने में तो प्रॉब्लम हैं लेकिन एक दिन रंडीबाजी करने में तो मज़ा ही मज़ा है।

मौसी की बात मुझे कुछ सही लगी। मैं और आंटी अब आंटी के कमरे में आ गई थी। कमरा फाइव स्टार जैसा था। आंटी ने अपनी साड़ी ब्लाउज उतार दिया। आंटी की चूचियां पपीते जैसे लटक रहीं थी, आंटी सिर्फ़ पेटीकोट पहने थीं। आंटी ने घंटी बजाई, एक मुस्टंडा अंदर आया, आंटी बोली- कालू जरा पानी-वाणी पिला !

आंटी मुझे देखकर मुस्करा कर बोली- शरमा रही है, अभी तुझे नंगा कराती हूँ, कोठे की मस्ती तो चख ले।

मैंने कहा- नहीं मौसी, मुझे नंगा नही होना !

मौसी मुस्कराईं, बोली- हमारा वादा केवल तेरी चुदाई न होने तक का है।

कालू पानी लेकर आ गया। हम दोनों को बड़े प्यार से उसने पानी पिलाया. मौसी बोली- अबे कालू तेरी मौसी नंगी खड़ी हैं और साली यह हरामन कपड़े पहने हुए है, चल जरा इसे नंगा तो कर।

कालू ने एक झटके में मेरी साड़ी खींच दी और मेरा ब्लाउज हाथ से खींच कर फाड़ दिया। मेरी ब्रा आधी लटक गई जिसे उसने एक झटके में उतार दिया। अब मैं पेटीकोट में थी, यह सब कुछ सेकंड में ही हो गया मैं विरोध भी नहीं कर पाई। कालू पेटीकोट भी फाड़ने वाला था लेकिन मौसी ने इशारे से उसे बाहर भेज दिया।

मेरी संतरे जैसी चुचियों पर मौसी ने हाथ फिराकर कहा- माल तो बड़ा तगड़ा हैं तेरा ! एक रात के दस हज़ार तो आराम से लगेंगे, बोल चुदना है क्या पूरे दस तेरे ! मेरी चूत में हलचल हो रही थी।

मौसी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी बगल में लेट गयीं, कहा- तुझे मैं कोठे की मस्ती करवाती हूँ, करके देख, कैसे रंडियां लोड़े से खेलती हैं, मर्दों की मुठ कैसे मारती हैं, लंड चूसती हैं तुझे सिखाती हूँ। चुदने का मन हो तो बताना चुदाई भी करवा दूँगी गांड और चूत दोनों की। फुल मस्ती कर आज रात जिन्दगी भर याद रहेगी।

मौसी की बातों से मुझे मस्ती आने लगी। मेरा मन मुस्टंडौं के सामने नंगी होने का करने लगा, मेरी चूत से भी पानी रिसने लगा था।

मौसी बोली- अब तू मेरे कोठे की रांड है, तेरी चूत और गांड तेरी मर्ज़ी पर छोड़ती हूँ, बाकी तेरे को आज की रात के लिये रंडी बनाती हूँ, समझी! रंडीबाजी का मतलब होता है नग्न अदायें दिखाना, नंगी चूचियां कर के कस्टमर से दबवानी, लंड चूसना, लोड़ों को हाथों से मसलना और लंड की मुठ मारनी, पूरी नंगी होकर चूत चुसवानी, बाकी बची चूत और गांड की चुदाई तो वह सब से आख़िर में आती है।

५ बज रहे थे, मौसी ने एक चुन्नी मेरे नग्न दूधों पे डाल दी और बोली- चल तेरा रंडियों जैसा सिंगार करवाती हूँ। मौसी मुझे सिंगार रूम में ले जाने लगीं रास्ते में मौसी के गुंडे घूम रहे थे। मेरी नग्न चूचियां सब घूर घूर कर देख रहे थे।

सिंगार रूम का सीन बड़ा आकर्षक था। चार -पाँच रंडियाँ शीशे के सामने मेक अप कर रहीं थी, सभी टोपलेस थीं, कुछ नंगी होकर चूत में क्रीम लगा रहीं थीं। कुछ गुंडे टाइप लोग कमरे में घूम रहे थे। एक दो गुंडे रांडो की चूचियां मसल रहे थे। सीन बड़ा ही सेक्सी था।

मौसी मुझे देखकर मुस्कराईं बोली- चल तू भी नंगी हो ! तेरा माल भी तो देखें जरा हम !

मौसी ने कहा- चल पेटीकोट उतार ! शरमा नहीं ! रंडी बन जा आज रात के लिए ! अगर मस्ती के साथ करोगी तो बहुत मजा आएगा, देख सब राँडे नंगी मस्ता रहीं हैं।

मेरी चुचियाँ तो नग्न थी हीं, मैंने शरमाते हुये अपना पेटीकोट भी उतार दिया। अब मैं सिर्फ़ चड्डी में थी। चड्डी उतारने में मुझे शर्म आ रही थी। मौसी ने सीटी बजा कर कालू को इशारा किया। कालू ने पीछे से आकर मेरी चूचियां कस कर मसल दी। इस बीच राजू मुस्टंडे ने आगे से मेरी चड्डी उतार दी, अब मैं पूरी नंगी थी।

मौसी ने मेरी झांटो वाली चूत की तरफ़ देख कर कहा- अरे तुम साली औरतें पति को भी मस्ती ठीक से नहीं देती क्या काला जंगल उगा रखा है ! मौसी ने एक रंडी को इशारा कर कहा- जरा झांटे साफ़ करने वाली क्रीम तो ला !

मौसी ने मेरी चूत पर क्रीम लगा दी और मुझे एक गद्दे पे बठने को कहा और बोली- पाँच मिनट में तेरी झांटे साफ़ हो जाएँगी।

अब मैं नंगी बैठी कोठे के नज़ारे देख रही थी, शर्म आ रही थी, गुंडे बार बार गंदे इशारे कर रहे थे। पाँच मिनट बाद मोनी नाम की रांड ने मेरी चूत गीले कपड़े और पानी से साफ़ कर दी, अब मेरी चिकनी चूत चमचमा रही थी। मेरी शर्म भी धीरे धीरे कम हो रही थी।

मौसी ने कहा- ६ बज गए हैं, धंधे का टाइम हो रहा है, मैं जरा धंधे को देखती हूँ, तू जरा कोठे पे घूम और रंडियों की तरह मस्ता ! तेरे साथ मोनी नाम की रंडी की ड्यूटी लगा देती हूँ। ८ बजे तेरे ऊपर भी एक-दो कस्टमर चढ़वाती हूँ।

मौसी की बातों और कोठे के नजारों से मेरी चुदने की इच्छा बढती जा रही थी। मोनी ने मुझे बताया- तू मेहमान है इसलिए मौसी इतने प्यार से बात कर रहीं हैं वरना जिस रंडी से गुस्सा हो जाती हैं, पूरी रात उसकी गांड और चूत अपने मुस्टंडों से चुदवाती हैं और पीटती अलग हैं सब मुस्टंडों के लंड बहुत मोटे और लंबे हैं। सारे मुस्टंडे कुत्ते की तरह मौसी के आगे दुम हिलाते हैं, मौसी के एक इशारे पे यह जेल पहुँच जाते हैं इतनी तगड़ी पहुँच है मौसी की। चल तुझे कोठे की सैर कराती हूँ, धंधा भी शुरू हो चुका है। पेटीकोट और ब्लाऊज़ डाल ले !

मैंने साइड में पड़ा हुआ एक पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन लिये। ब्लाऊज़ में एक ही हूक था, चुचियाँ आधी से जयादा खुली थी, थोड़ा हिलने पे निप्पल भी दिखने लगते थे, पेटीकोट नाभि के काफ़ी नीचे बंधा थे। मोनी भी एक मिनी स्कर्ट और मेरी तरह ब्लाऊज़ पहने थी।

मैं बिल्कुल धंधे वालियों जैसे लग रही थी। मौसी ने मेरी चूत पे जो क्रीम लगायी थी उससे मेरी चूत में लंड खाने की इच्छा भी बढ़ रही थी. मैंने जब मोनी को यह बताया तो मोनी मुस्कराई, बोली- मौसी तुझे चुदवा कर ही जाने देंगी ! बड़ी गुरु हैं मौसी !

मोनी मुझे पहले डांस रूम में ले आई। यहीं से कस्टमर अंदर आते थे। डांस रूम काफी बड़ा था। मौसी वहाँ गद्दी पर बैठी हुईं थीं, मुस्टंडे चारों तरफ़ टहल रहे थे। ५-६ लड़कियाँ अर्धनंगी होकर डांस कर रहीं थी। साइड में मेरी जैसे ड्रेस पहने १०-१०, २०-२० के झुंड में रंडियां बैठी हुईं थी. नाचने वाली लड़कियाँ डांस कम रंडीबाजी ज्यादा कर रहीं थी वो अपना लहंगा बार बार उठा रहीं थी और बार बार अपनी चूत दिखा रहीं थी।

मुस्टंडों से बीच बीच में कुछ सेकंड्स के लिए अपनी चूचियां मसलवा रही थीं। बीच बीच में एक दो गु्ण्डे आकर रंडियों की ब्लाऊज़ और टॉप उठाकर उनकी चुंचियाँ खोल देते थे, जिसे वो दुबारा ढक लेती थीं।

करीब १०-२० ग्राहक वहाँ डांस देख रहे थे और वो बीच बीच में नोट भी फेंक देते थे। मोनी ने मुझे बताया- यहाँ तीन रेट में लड़कियाँ बिकती हैं, वो जो घटिया सी दिख रहीं हैं आंटी टाइप उनके रेट १०० से ३०० रुपए एक तक घंटे हैं, दूसरी साइड वालियों के ५०० से १००० रूपए तक एक घंटे का हैं। मौसी के पास जो बैठीं हैं उनके रेट मौसी बताती हैं, सब १००० से ऊपर वाली हैं।

मौसी हर कस्टमर का पूरा ध्यान रखती हैं, रंडी अगर मस्ती नहीं देती तो उसकी खाट खड़ी कर देती हैं। मौसी का कहना है- चूचियां मसलवाने के लिए और चूत चुदवाने के लिए है, कस्टमर को जम कर मज़ा दो उसका लंड चाटो और चूसो एक घंटे मैं अपना दीवाना बना दो गांड भी मरवाओ उससे !

अगर किसी भी रांड की शिकायत आती है कि उसने चूत चुदवाने में नखरे करे हैं तो उसकी खाल तो जलाती ही हैं साथ ही साथ १०-१० गुंडों से गांड और चूत भी चुदवाती हैं।

मौसी ने एक से एक नखरे वाली रंडियों को ठीक कर दिया है। वो जो जली हुई दिख रही है न उसने एक सफ़ेद दाग वाले नेताजी का लंड चूसने से मना कर दिया था, मौसी ने उसे जला दिया, अब सब करवाती है।

मौसी बड़ी खतरनाक हैं, लेकिन अगर कोई दारू में टुन्न आता है या अकड़ दिखाता है तो उसके नोट भी रख लेती हैं और लंड झड़वा के धक्के दे कर भगा देती हैं।

मोनी ने बताया उसके रेट ३०००-४००० के बीच लगते हैं और वो सब करवाती है केवल गांड छोड़कर, गांड मौसी के ही कहने पे चुदवाती हूँ अब तक ४-५ बार ही कुछ बड़े लोगो से गांड मरवाई है। मुझे धंधा करते हुए ६ माह हो गए। मेरा प्रेमी बेच कर गया था मुझे, चल आ मौसी के पास बैठते है देख कैसे रंडियां बिकती हैं !!!!!


कंडोम का प्रयोग करें : एड्स से बचें


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Old 06-25-2009, 11:42 AM
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Talking mount abuu mai chudaiiii




माऊंट आबू में मुम्बई की लड़की
हाय

मैं २३ साल जयपुर से हूँ.

बात तब की है जब मैं माउंट अबू में रहता था मेरी फॅमिली के साथ. वहां मेरे पापा ने एक शोरूम खोला था उस समय मैं भी कुछ दिनों के लिए गया था वहां.

तो वहां हमारे शोरूम के आस पास बहुत से होटल हैं और उन होटल में से एक होटल का मेनेजर मेरा अच्छा दोस्त बन गया था। क्यूंकि मुझे चिकेन मटन ज्यादा खाने की आदत है, तो मैं एक दो दिन मैं होटल में खाना खाता था और मेनेजर और मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी थी। हम अक्सर शाम को साथ में रहते थे.

बात उस रोज की है जब बोम्बे के एक गर्ल्स कॉलेज का टूर माउंट आबू घूमने के लिए आया था। उनमे से मुझे एक लड़की बहुत सुंदर लगी उसकी उमर होगी करीब १९ साल. गोरी चिट्टी, लम्बी पोरी, मस्त एक दम सेक्स बम्ब लग रही थी, दिल कर रहा था अभी के अभी खा जाऊं मगर इतनी सारी लड़कियां थी उसके साथ.

मैंने मन मार लिया और उसको देखता रहा। वोह हमारे शोरूम में चली गई. मैं जल्दी से उसके पीछे हो लिया और एक काउंटर पर जा कर खड़ा हो गया। जब वोह मेरे पास आई तो उसने कुछ दिखाने को कहा। मैंने उसको वोह चीज दिखाई, इस तरह उसने कुछ शौपिंग की। फिर उसने कहा कि इन सब का बिल बना दो।

मैंने एक दूसरे सेलमैन को बुला कर कहा कि मैडम का बिल बना दो, तो उस लड़की ने कहा आप ही बना दें. मैंने कहा मैं यहाँ का सेलमैन नहीं हूँ तो उसने पूछा फिर आप कौन हैं मैंने कहा मैं यहाँ का मालिक हूँ, मगर मैं यहाँ नहीं रहता, मैं जयपुर रहता हूँ, आजकल यहाँ घूमने आया हुआ हूँ। वोह तो मैं आप जैसी खुबसूरत लड़की को देख के यहाँ आकर खड़ा हो गया ताकि आपको ठीक से देख सकूँ.

वोह बोली तुमने मुझ में ऐसा क्या देखा?

मैंने कहा बाहर मिलो फिर बताता हूँ और तुम्हे अच्छी तरह से माउंट आबू की सैर करता हूँ. वैसे तुम कौन से होटल में रुकी हो.

वोह लड़की पहले तो मेरी तरफ देखती रह गयी कि मैंने एक साथ कितने सवाल किए. फिर थोड़ी देर बाद वोह बोली कि मैं पास के ही होटल में रूम नम्बर २१३ में रुकी हूँ, मगर आप वहां नहीं आ सकते हमारी वार्डेन ने पूरा होटल सिर्फ़ हम लड़कियों के लिए बुक किया हुआ है. मैंने कहा ठीक है मैं तुम्हे होटल के रिसेप्शन पर मिलूंगा तुम टाइम बताओ कब मिलोगी.

उसने कहा कि अभी तो हम सब बाज़ार घूम के होटल जायेंगे उसके बाद लंच के बाद फिर साईट सीइंग के लिए जायेंगे.

मैंने कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने होटल में ६ बजे आऊंगा जब तक सारी लड़कियां और तुम्हारी वार्डेन भी थकी हुई होंगी दिनभर की सैर के बाद.

उसने कहा ठीक है. इतने में सेलमैन बिल लेकर आ गया मैंने बिल देखा और कहा यार कम से कम इतनी सुंदर लड़की को तो छूट दिया करो. और मैंने उसको ५० % छूट देकर कहा कि अब ठीक है. फिर वोह मेरी तरफ़ मुस्कुरा कर चली गयी.

अब मैंने होटल मेनेजर से कहा कि यार तुमने बताया नहीं कि तुम्हारी होटल में बहार आई हुई है.

उसने कहा यार तुझे कैसे पता तू तो दो दिन से होटल आया भी नहीं.

मैंने कहा कि यार एक लड़की आई थी मेरे शोरूम पर मिलने को बोली थी. पता तुम्हारे होटल का दिया था शाम को ६ बजे मिलना है.

उसने कहा ए यार तूने भी अजीब सी फिकर लगायी है, तू शाम को आजा, मै तेरे लिए सॉलिड इन्तेजाम करवा दूंगा तू चाहे जो करना उसके साथ।

मैंने कहा ए इतनी जल्दी नहीं है यार अभी तो उसको माउंट आबू घुमाना है।

उसने कहा ठीक है जब भी मेरी जरुरत हो बोल देना क्या करना है.

फिर मैं शाम को होटल गया तो वोह भी रिसेप्शन पर मेरा इंतज़ार कर रही थी. मुझे देख कर बोली यार तुम तो ६ बजे आने वाले थे अभी ६ :१० हो रहे हैं, मैंने तो सोचा कि तुम आओगे ही नहीं.

मैंने कहा आता कैसे नहीं इतनी खूबसूरत लड़की से मिलने.

और हम दोनों वहां से चल दिए मैंने उसे अपनी बाईक पे पीछे बिठाया और हम सनसेट पॉइंट की तरफ़ चले गये वहां हमने सनसेट होते हुए देखा मुझे पता था कि सनसेट के बाद वहां बहुत अँधेरा हो जाता है और मुझे ये ही चाहिए था जैसे ही सनसेट हुआ और अँधेरा फैलता गया मैं उसको अपनी बाँहों मैं ले लिया और उसके होटों की किस करने लगा। जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैं समझ गया कि लड़की खेली खाई है। तो फिर सिर्फ़ किस से काम नहीं चलेगा। मैंने उससे कहा कि रात को मैं तुम्हारे होटल में ही एक कमरा ले लेता हूँ फिर मैं तुम्हे बताता हूँ क्या करना है. और हमने वहां से जाना ठीक समझा.

१० बजे मैंने मेनेजर से कहा कि यार मुझे उसके कमरे के पास वाला कमरा चाहिए तो मेनेजर ने कहा यार उस कमरे में तो साली वोह बुड्ढी वार्डेन है.

मैंने कहा यार तो मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकता है?

तो उसने कहा यार तेरे लिए तो मैं जरूर उस कमरे को खाली करता हूँ उसने उस कमरे कि लाइट ऑफ़ कर दी थोडी देर में वार्डेन के कमरे से फ़ोन आया कि यहाँ कि लाइट बंद कैसे हो गयी। तो मेनेजर उस कमरे में गया और कुछ देखने के बाद कहा कि मैडम लगता है कि कमरे में कहीं शोर्ट सर्केट हो गया है मैं ऐसा करता हूँ आपका कमरा बदल देता हूँ और उसने रूम बॉय को बुला कर कहा कि मैडम का सामान दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दो.

और मेरा काम बन गया। मैंने उस लड़की के कमरे में फ़ोन कर के कहा कि मैं तुम्हारे पास वाले कमरे मैं हूँ, तुम रात को ११ बजे मेरे कमरे मैं आ जाना.

उसने कहा कि पास वाला कमरा तो वार्डेन का है। मैंने कहा कि मैंने खाली करवा लिया है. अब इस कमरे में मैं हूँ.

फिर जैसे ही रात को ११ बजे उसने मेरे कमरे का दरवाज़ा खटखटाया, मैंने दरवाज़ा खोल कर उसको अन्दर लिया और दरवाज़ा लोक कर दिया। मैंने उसको वहीं से किस करना शुरू किया और बेड पर ले गया। फ़िर मैं रुका और कहा- यार ! मैंने तुम्हारा नाम तो पूछा ही नहीं ! क्या नाम है तुम्हारा?

उसने बताया- मेरा नाम दिशा है और तुम्हारा?

मैंने कहा- अली। मैंने उसे फ़िर से किस करना शुरू कर दिया। फ़िर मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू किए और उसने मेरे कपड़े उतारे। अब हम दोनो ही नंगे हो गए और बेड पर एक दूसरे के पास लेट गए। मैंने उसके बूब्स को दबाया तो वो भी मेरे लण्ड को सहलाने लगी।

मैंने उसको कहा कि लगता है कि बड़ा ऐक्स्पीरियंस है तुम्हें इस काम में।

तो उसने कहा- हां ! मगर अभी तक किसी लड़के के साथ नहीं किया है, अभी सिर्फ़ मैं और मेरी होस्टल वाली फ़्रेन्ड एक दूसरे को शान्त करते हैं।

मैंने कहा - फ़िर यह सील कैसे टूटी?

तो उसने कहा कि मेरी फ़्रेन्ड ने एक बार लम्बे बैंगन से मेरी चुदाई की थी तो उस दिन मेरी सील टूट गई थी और बहुत सारा खून भी निकला था।

मैंने कहा- ठीक है, आज मैं तुम्हें सिखाता हूं कि लड़के के साथ सेक्स कैसे करते हैं। मैं उसके ऊपर चढ गया और उसके दोनो बूब्स को बारी बारी चूसा। कभी उसकी चूची को काटता, कभी मसलता तो वो तड़प जाती। मैंने उसको अपना लण्ड हाथ में दे रखा था और वो उससे खेल रही थी। वो बोली कि मैं तुम्हारा लण्ड अपने मुंह में लेना चाहती हूं। तो मैं उसके सीने पर आ गया और उसके मुंह में अपना लण्ड डाल दिया। वो उसे लोलीपोप की तरह चूस रही थी।

4-5 मिनट बाद उसने कहा कि अब तो रहा नहीं जा रहा, बस कर दो।

मैंने कहा- क्या करूं?

तो उसने चूत की तरफ़ इशारा कर के कहा कि यहां खुजली हो रही है, शान्त कर दो।

मैंने कहा- बस इतनी सी बात है, अभी करता हूं जानेमन !

और मैंने अपनी पैन्ट की जेब से कन्डोम का पैक निकाला, लण्ड पे चढा के उसकी चूत के गेट पे रख कर धीरे से अन्दर डाला तो वो बोली- निकालो ! यह तो बहुत मोटा है, दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- जान ! थोड़ा सा दर्द तो होगा, बाद में मज़ा भी आयेगा। तुम बस देखो। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में डाल दिया। अब उसे मज़ा आने लगा।

फ़िर मैंने जोर से दो तीन झटके मार कर पूर लण्ड उसकी जड़ तक पहुंचा दिया। वो फ़िर से चीखने लग गई। अब मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और झटके जारी रखे तेज़ तेज़, धीरे धीरे वो शान्त हो कर चुदवाने लगी। बल्कि अपनी गाण्ड हिला कर साथ भी देने लगी। फ़िर मैंने अपनी स्पीड फ़ुल कर दी और झटके पे झटके मारता रहा।

अब तक वो दो बार झड़ चुकी थी लेकिन अब बारी मेरे झड़ने की थी और मेरे झटके कम होते गए और मैं उसकी चूत में झड़ गया।

फ़िर जब हम दोनो शान्त हो गए और बेड पर एक दूसरे के पास पास लेट गए तो मैंने अपने लण्ड की तरफ़ देखा तो कन्डोम फ़ट चुका था। मैंने उसकी चूत की तरफ़ देखा तो मेरा वीर्य निकल रहा था उसकी चूत में से। मैंने उससे कहा- भाग ! बाथरूम में और मूत के आ, वरना परेशानी हो जाएगी।

वो जल्दी से लड़खड़ाते हुए बाथरूम की तरफ़ भागी, दो तीन मिनट बाद आई, थक कर बेड पर पड़ गई और कहने लगी आज तो मर जाती अगर तुम नहीं देखते तो।

मैंने कहा- जान ! हम तो सिर्फ़ मज़े करना चाहते हैं सज़ा नहीं भुगतना चाहते।

फ़िर हम थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद तीन चार बार अलग अलग स्टाईल में सेक्स किया और सो गए।

सुबह पांच बजे उठ कर मैंने उसे जगा कर कहा- अब तुम अपने कमरे में जाओ और मैं भी जाता हूं, फ़िर रात को मिलेंगे इसी कमरे में, और हम दोनो चले गए।

यह सिलसिला तीन दिन चला। फ़िर वो मुम्बई चली गई। जाते समय अपना पता और मोबाईल नम्बर दे कर कहा कि कभी मुम्बई आओ तो जरूर मिलना।मैं एक बार मुम्बई गया तो उससे सम्पर्क किया तो वो बोली कि वैसे तो मैं अब मुम्बई में नहीं रहती, मेरी शादी हो चुकी है, पर हम मिल सकते हैं क्योंकि मैं आजकल मुम्बई में अपने मायके आई हुई हूं।

फ़िर वो मुझे जूहू बीच पर मिलने आई और आते ही टैक्सी में बिठा कर पूछने लगी कि तुम कौन से होटल में रुके हो। मैंने कहा कि मैं तो वीटी के पास एक होटल में रुका हूं।

तो उसने टैक्सी वाले को वीटी चलने को कहा और हम होटल के कमरे में पहुंच गए। उसने मुझे अपनी बाहों में लपेट लिया और कहने लगी कि मैं आज तक तुम्हारी वो चुदाई नहीं भूली हूं जो तुमने माऊंट आबू में की थी।

और कहने लगी कि मेरा पति तो बिल्कुल निक्कमा है, साले से चुदाई तो होती नहीं, बस गाण्ड मारता है, वो भी दो तीन मिनट में हिल हिला क हट जाता है हरामी।

काश ! तुम मेरे पति होते !

ठीक है! अब तुम जितने दिन मुम्बई में हो, मैं तुमसे रोज़ चुदवाऊंगी।

और हमने चुदाई की तीन बार।

अगले दिन आने का बोल कर वो चली गई और जाते समय अपना पुणे का पता भी मुझे दिया।

मेरा मुम्बई में तीन चार दिन का काम था। हम दोनो ने रोज़ खूब मज़े किए, मूवी देखने गए, होटल में ज्यादा से ज्यादा वक्त रहते और खूब जी भर कर चुदाई करते।

फ़िर मैं वापिस आ गया। उसके बाद मैं दोबारा उससे नहीं मिल पाया।


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Old 06-25-2009, 11:48 AM
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Talking antima ki kamsin choot

:d

अन्तिमा की कमसिन चूत
हैलो माई डियर रीडर्स,

मैं संजु, २६, लखनऊ उत्तर प्रदेश, ज्योतिष और सेक्सी कहानियों का शौकीन। सभी भाभियों सालियों कुंवारी चुदी चुदाई चूतों, भोसड़ों को एक बार फ़िर आपका संजु बार बार प्रणाम करते हुए ये विश्वास दिलाता है कि जिस तरह से आपकी बुर और भाईयों के लंड से मेरी पहली कहानी पढ़कर वीर्य के छीटें हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका तक पहुंचे। इस बार भी आप लोग पहले की तरह मेल करके बताइयेगा कि बुर भोसड़ा बन गयी या नहीं लंड के चोदने की रफ़्तार ४ गुना हुई या नहीं। बुर के फ़ौव्वारे से आदमियों के लंड भीगे या नहीं?

कहानी पे आ जाइये भाई भाभी लंड पे हाथ बुर में उंगली सावधान, अन्तिमा मेरी दूर के रिश्ते की मौसी लगती है जिनका घर बंगलौर में है एक काम के सिलसिले में मैं उनके घर गया हुआ था, अन्तिमा जी की उमर २१ साल रंग गोरा ५'६ इंच। मैं उनके घर गया तो उनकी मामी ने मुझसे इंट्रोड्यूस कराया कि ये आपकी छोटी मौसी लगती है मोडल बनना चाहती है प्लीज़ थोड़ा इसके बारे में देख कर बताओ कि क्या इसे सक्सेस मिलेगी, मैने हाथ देखा और बोला कोशिश कीजिये थोड़ी सफ़लता जरूर मिलेगी आपका भाग्य अच्छा है लेकिन आप मोडल्स सेलेक्ट करेंगी न कि खुद मोडल बने, आपकी शादी लव मैरिज का योग साफ़ दिख रहा है, वो बोली आप क्यों मम्मी को भड़का रहे हैं और पैर पटक कर अपने ऊपर वाले कमरे में चली गयी, उसने खाना भी नहीं खाया तो मैने उनकी मम्मी से कहा आप खाना लगाइये मैं उसे बुला कर लाता हूं,

मैं ऊपर गया तो उसका दरवाजा खोल कर अन्दर गया और दरवाज़ा फ़िर हल्का से बंद हो गया, वो बेड पर पेट के बल लेटी थी रो रही थी मुँह छुपाकर उसकी छोटी सी स्कर्ट उसके लेटने की वजह से थोड़ी और ऊपर हो गयी थी उसकी पिंक पैंटी साफ़ नजर आ रही थी चिकनी जांघें संगमरमर सा शरीर कि नीयत खराब हो जाये मैने उसकी पीठ पर हाथ रखकर कहा अन्तिमा उठिये ये सब क्या है प्लीज़ उठो चलो सब इन्तज़ार कर रहे हैं

अचानक वो उठी और मेरे सीने से लिपटकर रोने लगी उसकी गोल चूचियां मेरे सीने से दब रही थी उसकी पीठ सहलाते सहलाते मेरा लंड तन गया मेरे शरीर में करेंट दौड़ गया २० साल की गरम लड़की मुझे बुरी तरह से अपने अंग से अंग को लगाकर दबाये जा रही थी उसने अपनी शर्ट के बटन को खोल दिया और बोली संजु प्लीज़ आप जो चाहो कर लो लेकिन मम्मी से जो कहा है एक बार मम्मी से कह दो कि वो झूठ है मैने बहुत सपने सजायें हैं बोलीवुड के लिये आज तक मैने किसी लड़के को कुछ भी नहीं दिया प्लीज़ मेरे सपनों को मत तोड़ो ....... मैं जानती हूं कि कोई भी मर्द किसी लड़की की इज़्ज़त को लूटने के लिये कुछ भी कर सकता है मेरी सभी सहेलियां अपने ब्योयफ़्रेंड्स से सेक्स का मज़ा लेती हैं लेकिन आज तक मैने कभी किसी भी मर्द को अपने चूचियां तक छूने नहीं दिया .. बुर तो आज भी मेरी उतनी ही खुली है कि मैं सिर्फ़ मूत सकूं, सारी फ़्रेंड्स जिनके पास ब्योय फ़्रेंड्स नहीं हैं वो एक दूसरे की चूचियां मुंह में लेकर चूसती हैं बुर में पानी की प्लास्टिक पाइप भी डलवाती हैं बिस्तर पर एक दूसरे की चूत से चूत रगड़कर झड़ जाती है..........

वो बताती हैं कि तुम बहुत सेक्सी हो किसी भी तरह अगर महेश भट्ट या फ़िर राम गोपाल वर्मा के पास पहुंच जाओ तो तुम्हारा काम............ जरूर हो जायेगा पर लिंक तो ढूंढना पड़ेगा,........... संजु आपके पास इतने बड़े बड़े कोन्टक्ट हैं प्लीज़ कोई भी जुगाड़ करो न..संजु मैने आज तक अपनी झांटें ओरीजिनल रखी हैं कभी नहीं बनाई देखो ये रही उसने अपनी स्कर्ट उतार कर फ़ेंकी और अपनी बुर के पास मेरा हाथ लेगाया और बोली देखो प्लीज़.......... मैं झूठ नहीं बोल रही आप इतने अच्छे हो कि क्या कहूँ मुझे पता है कि आपकी कही बात गलत नही होती मैने आपके बारे में सुन रखा है पर ......... क्या आपकी एक बात मेरी जिंदगी की सारी मेहनत, कुंवारी चूत की तपस्या सब बर्बाद हो जायेगीईईईईई नहीं आपको मेरा सब कुछ सही करना होगा........जो पैसा लगेगा मैं दूंगी, मेरी सबसे बड़ी दौलत मेरी कुंवारी चूची और चूत है ... आप जो करना चाहे..........

मैं उसकी बातों को सुनकर स्टेच्यु हो गया कि क्या औरत या कोई भी लड़की इतनी बेशरमी से बात भी कर सकती है......... मैने कहा अच्छा नीचे........आओ सब लोग इन्तज़ार कर रहे हैं मैं देखता हूं क्या कर सकता हूं............ मेरा लंड तनकर बम्बू हो गया।........चुदाई तो कर सकता था लेकिन कुछ परेशान भी था कि क्या करूं .... तो वो बोली नहीं अभी बताइये ...................ओह्हह्हह्हह्हह अब समझी ....... मुझे आपको एडवांस देना है इतना कहकर उसने दूर बंद कर लिया वो मेरी पैंट की ज़िप खोल दी और मुँह में लेकर चूसने लगी ...... बोली संजु प्लीज़ बताओ अच्छा लग रहा है मैने कहा अन्तिमा मैं पागल हो जाउंगा प्लीज़ ......मैं क्या करूं वो बोली चलो अच्छा मेरी चूत को भी चोद लो.......लेकिन मेरी बुर में इतना मोटा लंड .......... कल मेरी सहेली के घर में चोद लेना नहीं तो मैं चिल्लाउंगी तो कोई........आ......जायेगा........इतना कहकर वो मुझे बेड पर ले गयी और ब्रा हुक खोल कर दोनो चूचियां जो गोल गोल लाल लाल भुंडियों के साथ थी आपस में सटा लिया और बोली आज़ इसमें ही चोद लो प्लीज़.........बुर में कल.............

मैं पागल हुआ जा रहा था उसकी चूचियों को मुँह से थूक लगा लगा कर चूस रहा था वो भी आह्हह्हह्हह्हक्सह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊऊह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ल्लल्लल्लल्लूऊऊऊऊऊऊऊस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस तभी मैने एक उंगली बुर में डाली और उसकी बुर भी लसलसी हो चुकी थीईईईईईईइ लेकिन मुझे पता लग गया कि वो चूत कुंवारी है यहां चोदना .........रिस्की है,,,,,,,,,,, मैने उसके गुलाबी होंठों को जीभ से भर दिया वो भी मस्ती में आआह्हह्हह्हह्हह्ह प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़व्वव्वव्वव्वव्ववूऊऊओ कर रही थी तभी चूचियों के बीच में मेरा लंड ने फ़ौव्वारा छोड़ा और छींटें उसके बालों पर भी पड़े अब मैं झड़ गया लेकिन बुर की चुदाई से मुझे कई गुना मज़ा आया, वो बोली संजु...एडवांस दे दिया है .....बुर कल चुदवाउंगी प्लीज़............आज सही बताउं तो बड़ा मजा आया कल चलना मैं अपनी सहेली की बुर दिलवाउंगी वो अभी उंगली डालती है......... और अगर तुम्हें मेरी ही कुंवारी बुर को चोदना हो तो मेरी भीईईईईइ..................................इतना कहकर वो बाथरूम चली गयी....... मैं भी लंड धुलकर नीचे आयाआआआअ............कल मैने दोनो की बुर ली


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